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सनावद नगर पालिका का इतिहास


सनावद नगरपालिका की स्‍थापना सन 1895 मे हुई थी l इस नगर का प्राचीन नाम गुलशनावाद है जिसका संबंध मुगल सम्राट औरंगजेब से जुडा हुआ है l वीर पेशवाजी राव प्रथम की मराठा सेनाये भी यहॉ मेला पीरान पीर मैन मे पडाव डालती थी l 1985 से इस नगरपालिका का रिकार्ड उपलब्‍ध है l 1899 में इस नगरपालिका की आय केवल 2000 रूपयें वार्षिक थी l उस समय पर‍िषद का सभापति कलेक्‍टर, उपसभापति तहसीलदार, और सेक्रेटरी नायब तहसीलदार होता था l वर्तमान मे मुख्‍य नगरपालिका अधिकारी सेक्रेटरी होता है l नगरपालिका मे एक बावू, वसूली के लिये चार नाकेदार, छै सफाई कर्मचारी और दो रोशनदार होते थे l इन्‍हे न्‍यूनतम वेतन 5 रूपये दिया जाता था l कालान्‍तर मे इस नगरपालिका ने जिस तेजी से प्रगति की है उसका विवरण बहुत दिलचस्‍प है l विकास का प्रथम चरण नगरपालिका के द्वारा वाटर वाक्‍स का निर्माण कराया जाना l नगरवासियों के लिये पेयजल का एकमाञ स्‍ञोत बाकुंड नदी और उसके नारे खोदे गये झीले आदि थी l इस असुविधा को दूर करने के लिये जिले के कलेक्‍टर ठा. बलवंतसिंह जी के सहयोग से नगर के पश्चिमी भाग की खुली भूमि विक्रय करके एवं होलकर रियासत से ऋण लेकर 1924-25 में नदी किनारे कुऑ खुदवाया गया, जिसमें दो टंकिया बनी और पाईप लाईन डाली गयी l इस प्रकार नगर के आठ हजार निवासियों को पेयजल सुविधा प्राप्‍त हुई lखरगोन जिले मे यह पहला वाटर वाक्‍स था l जिसके इंजीनियर श्री डाहया भाई थे l इसका विस्‍तार 1953-54 मे हुआ l नदी पर वॉध उसकी ऊची टंकी बनी तथा नया कुऑ खुदवाने के साथ ही साथ पाईप लाईन भी बदली गयी, इसमें निर्वाचित अध्‍यक्ष श्री माया चंद जटाले (स्‍व) की सक्रिय पहल रही l नगर की बढतली जनसंख्‍या की आवश्‍यकता कोपूरा करने के लिये परिषद ने श्री ध्‍यानसिंह सोलंकी की अध्‍यक्षता में नर्मदा पेयजल योजना प्रस्‍तावित की l तदनुसार लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांञिकी विभाग ने 1977 मे अपनी तुलनात्‍मक रिपोर्ट तैयारी की l 1983 मे अपने निमाण प्रवास के दौरान मुख्‍यमंञी श्री मोतीलाल वोरा की स्‍वीक़ति के बाद नर्मदा का पानी मिलने से स्‍थानीय वाटर वर्क्‍स का स्‍ञोत बढा l सनावद के महत्‍वपूर्ण जनहित कार्यो मे भी नगरपालिका ने अपना उल्‍लेखनीय योगदान दिया है l यहॉ शासकीय बालक उच्‍चतर माध्‍यमिक विदयालय मे नये भवन के लिये एक लाख रूपये, पालिटेकनिक कालेज के लिये 50 हजार रूपये, शासकीय कन्‍या उच्‍चतर माध्‍यमिक विदयालय मे लेबोरेटरी के उपकरण खरीदने के लिये पॉच हजार रूपये की राशि योगदान स्‍वरूप प्रदान की गयी l सन 1857 की क्रांति के 100 वर्ष पूर्ण होने पर एवं महात्‍मा गॉधी के जन्‍म शताब्‍दी के समारोहों की स्‍म़तियां आज भी नागरिकों के मन मे ताजा है l



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